अब गूगल बताएगा कोरोना वायरस का ठिकाना

अब गूगल बाबा कोरोना का पता बताएंगे। सरकार ऐसी व्यवस्था करने जा रही है जिससे गूगल मैप पर कोरोना संक्रमितों का इलाका दिखाई देगा। इसके लिए संक्रमितों की जानकारियों स्वास्थ्य विभाग ने प्रदेश के सभी जिलों के सिविल सर्जनों से मांगी है। बताया जा रहा है कि संक्रमितों की पूर्व और वर्तमान की जानकारी के साथ उनके मोबाइल नंबर का सर्च किया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव के पत्र के बाद पटना में संक्रमित हुए लोगों का अक्षांश और देशांतर खंगाला जा रहा है। सिविल सर्जन ने इसके लिए फील्ड में काम करने वाली एजेंसी को लगाया है जो पूरी जानकारी इकट्ठा कर रही है।

हेल्थ इमरजेंसी ऑपरेटिंग सेंटर पर डाटा

स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ने सिविल सर्जन को भेजे गए पत्र में कहा है कि जिलों के कोविड-19 के पॉजिटिव मरीजों को विभागीय एचईओसी, हेल्थ इमरजेंसी ऑपर्रेंटग सेंटर के पोर्टल पर अपलोड किया जाना है। अधिकारियों का कहना है कि संक्रमित मरीजों का विवरण पोर्टल पर अपलोड किए जाने के बाद मरीजों के आवास के आसपास कंटेनमेंट जोन और बफर जोन चिन्हित किया जा रहा है। 

अक्षांश और देशांतर से काम होगा आसान

अक्षांश एवं देशांतर दर्ज किए जाने के बाद काम आसान हो जाएगा। किसी स्थान के अक्षांश और देशांतर से जीपीएस का काम आसान हो जाता है। ग्लोबल पोजीशिन सिस्टम से मरीजों से संबधित पूरी जानकारी फीड करने के बाद गूगल के मानचित्र पर पूरी जानकारी आसानी से मिल जाएगी। मरीजों की पूरी जानकारी फीड करने के बाद आरोग्य सेतु एप पर भी सुविधा और जानकारी बढ़ा दी जाएगी। स्वास्थ्य विभाग से जुड़े सूत्रों की मानें तो अक्षांश और देशांतर की पूरी जानकारी होने के साथ संबंधित का मोबाइल नंबर भी लिया जा रहा है। स्वास्थ्य विभाग को इससे काफी फायदा होगा। सर्वे का काम क्वारंटाइन सेंटर बनाने का काम तो आसान ही होगा साथ ही आम लोगों को भी प्रतिबंधित क्षेत्र की जानकारी गूगल मैप से मिल जाएगी। इतना ही नहीं तब मैप से संक्रमितों का भी लोकेशन और दूरी का भी पता आसानी से चल जाएगा।

स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव ने पत्र में कोविड-19 के संक्रमित मरीजों का पूरा पता लेने के साथ पूर्व और वर्तमान के साथ अक्षांश और देशांतर को सॉफ्टवेयर पर लोड करने का निर्देश दिया है। इसके लिए पूर्व में भी स्वास्थ्य विभाग को गूगल सीट भेजा गया है। गूगल सीट पर स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम काम करेगी और संक्रमितों की पूरी जानकारी को सीट पर अपलोड करने का काम करेगी।

स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव का कहना है कि संक्रमितों का पूरा पता विभाग के पास नहीं है। इस कारण से तकनीकी स्तर पर हो रही तैयारी का पूरा परिणाम सामने नहीं आ रहा है। मरीजों का न तो पूरा पता मिल रहा है और ना ही जियो क्वार्डिनेट ही मिल रहा है। इस कारण से मरीजों को तकनीकी स्तर पर गूगल पर लाने का काम भी नहीं हो पा रहा है। बताया जा रहा है कि प्रधान सचिव इस अभियान को लेकर गंभीर हैं। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग को दो बार आदेश किया जा चुका है।

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